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शायद राजनितिक हिंसा का शिकार पुलिस भर्ती, निरस्त हो गया एग्जाम (यू0पी0पुलिस कम्प्यूटर आपरेटर एवं ए0एस0आई0 गुप्त संवर्ग)

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आपको यह जानकर अति हर्ष होगा कि यू0पी0पुलिस कम्प्यूटर आपरेटर एवं ए0एस0आई0 गुप्त संवर्ग की भर्ती प्रक्रिया में हुए एग्जाम को निरस्त कर दिया गया । स्पष्टतः भर्ती बोर्ड पुनः परीक्षा का आयोजन करेगा। इस भर्ती का एग्जाम शांति पूर्वक सम्पन्न हुआ था फिर भी इस एग्जाम को निरस्त कर दिया । भर्ती प्रकिया में पहले से ही बहुत लापरवाही बरती जा रही थी युवा टाईपिगं टेस्ट की तैयारी कर रहे थे और इस बात का इन्तजार कर रहे थे कि टाइपिगं टेस्ट हो जाये लगभग 4 माह तक टाइपिगं टेस्ट का बेसब्री से इन्तजार कर रहे युवाओ को आज यह खबर मु्ख्य वेबसाईट से पता चला कि एग्जाम निरस्त हो गया है। एग्जाम निरस्त होने से युवाओ में रोष व्याप्त है ट्वीट वगैरे के माध्यम से युवा अपने विचार रख रहे है। ओऱ कुछ युवा कोर्ट का दरवाजा खटखटकाना सोच रहे है.... आपका गुस्सा जायज है दोस्तो मगर ये हम लोगो की बदनसीबी है कि हम ऐसी प्रदेश में रहते है जहा विकास पर नही राजनिति पर ज्यादा ज़ोर दिया जाता है। वास्तव में युवा अब अपने आपको ठगा सा महसूस कर रहा है अब तक इस भर्ती में जहा जोईनिगं मिल जानी थी वही यह एग्जाम निरस्त करके शायद उत्तर प्रदेश सरकार ने…

आपकी जिंदगी से जुड़ी कुछ दिलचस्प बाते...............

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1.  👍धरती फाटै मेघ मिलै,_          कपडा फाटै डौर।_        तन फाटै को औषधि,_   मन फाटै नहिं ठौर।।_ 👍👇🏾
_✍जब धरती फटने लगे अर्थात दरारे पड़ जाये तो मेघों द्वारा जल बरसाने पर दरारें बन्द हो जाती हैं और वस्त्र फट जाये तो सिलाई करने पर जुड़ जाता है। चोट लगने पर तन में दवा का लेप किया जाता है, जिससे शरीर का घाव ठीक हो जाता है *                  किन्तु मन के फटने पर कोई औषधि या उपाय कारगर सिद्ध नहीं होता।* _अतः प्रयास रहे कि आपकी वाणी से किसी को ठेस न लगे।*✍


2.  किसी ने पूछा इस दुनिया में आपका अपना कौन हैं..,
मैंने हंसकर कहा-- *समय!!
अगर वो सही, तो सभी अपने, वरना कोई नहीं.........
3.  किसी को गलत समझने से पहले एक बार, उसके हालात समझने की कोशिश जरुर करों... हम सही हो सकते है...  लेकिन मात्र हमारे      सही होने से ,  सामने वाला गलत     नही हो सकता...!!!
4.  बिकती है ना ख़ुशी कहीं,  ना कहीं गम बिकता है...
लोग गलतफहमी में हैं, कि शायद कहीं मरहम बिकता है...
इंसान ख्वाइशों से बंधा हुआ एक जिद्दी परिंदा है, उम्मीदों से ही घायल है और उम्मीदों पर ही जिंदा है...!
5.  दुनिया उन्ही की खैरियत पूछती …